घायल पक्षी के उपचार हेतु आगे आये युवा समाजसेवी. व्यक्तियों के साथ जानवरों व पक्षियों के प्रति एक समान भावना रखे लोंग-कुलदीप पाण्डेय.

घायल पक्षी के उपचार हेतु आगे आये युवा समाजसेवी.
व्यक्तियों के साथ जानवरों व पक्षियों के प्रति एक समान भावना रखे लोंग—कुलदीप पाण्डेय.

समाज में अनेकों घटनाएं घटित होती हैं जिसका पूर्वानुमान किसी को नहीं होता है,घटना व्यक्ति जानवर या किसी पक्षी के साथ कभी भी कहीं भी हो जाती है परन्तु घायल व्यक्तियों को सहारा देने के लिए अनेकों जनमानस के लोग तैयार रहते हैं लेकिन जब घटना किसी जानवर या पक्षी के साथ घटित होता है तो कुछ ही लोग सहायता के लिए आगे आते है या कोई जानवरों या पक्षियों से प्रेम करने वाला व्यक्ति ही सहायता करने के लिए सामने आता है.


इसी क्रम में आज दिनांक 18 जुलाई दिन शनिवार को प्रातः काल 9:00 बजे भारतीय युवा जनकल्याण समिति के संचालक व प्रदेश अध्यक्ष युवा समाजसेवी कुलदीप पाण्डेय के आवास गोकुलधाम कुलदीप कुँज के दरवाजे के सामने पक्षी के साथ घटना घटित हुआ, युवा समाजसेवी कुलदीप पाण्डेय ने देखा की दरवाजे के सामने सड़क पर एक पक्षी कबूतर किसी जानवर या बड़े पक्षी के हमले से घायल होकर लड़खड़ाते आते हुए इधर उधर बेचैनी के साथ चल रहा था उसी दौरान युवा समाजसेवी कुलदीप पाण्डेय ने नजदीक से जाकर देखा तो उसके शरीर पर जख्म के निशान थे उसको हाथ में लेकर सबसे पहले उसके जख्मों को गुनगुने पानी से साफ किये पूरे शरीर को कपड़े से साफ करते हुए पानी के कटोरे को कबूतर के सामने पीने के लिए रखा परन्तु दर्द से आहत कबूतर ने पानी नहीं पिया,उसके पश्चात कुलदीप पाण्डेय ने घर में से हल्दी,प्याज और भांग को पिसकर एंटीवायटिक दवा के रूप में बनाकर पक्षी के जख्म पर लगाकर उपचार किए जिससे कि कुछ समय पश्चात ही दर्द कम होने से पक्षी कटोरे में रखें पानी को भी पीने की कोशिश किया उसको सुरक्षित स्थान पर भी रख दिया गया जिससे किसी जानवर या पक्षी से खतरा ना हो सके.!कुलदीप पाण्डेय ने कहा कि इस तरह की स्थिति में व्यक्तियों के साथ-साथ जानवरों की सहायता करने से पूण्य फल कि प्राप्ति होती है मन मे शांति भावना का संचार होतात है, उपचार करने से कोई महान नहीं बन जाता परन्तु मानवता यही सीख देती है कि संसार में सभी जीवित प्राणियों के प्रति प्रेम भावना प्रदर्शित करना मानव धर्म है.


कुलदीप पाण्डेय ने यह भी बताया कि बचपन में नैतिक शिक्षा मे पढ़ाया गया अध्यायय सिद्धार्थ व चचेरे भाई देवदत्त की कहानी से सीख मिली थी जिससे आज जीवन सार्थक हो गया मारने वाले से बचाने वाला व्यक्ति सर्वोपरी होता है.
समाज सेवा का स्वरुप कोई निर्धारित नहीं है,निस्वार्थ भाव से समाज व देश हित में किसी के लिए किया जाने वाला कार्य समाजसेवा को प्रदर्शित करता है, सेवा लघु व बृहद भी हो सकता है सिर्फ मन में विश्वास व समाज के लिए कुछ करने की जिज्ञासा होनी चाहिए. पक्षी का उपचार करने का मात्र यही जनमानस के लिए संदेश है कि सभी जीव-जंतुओं को एक समान समझे व्यक्तियों की सहायता के साथ-साथ बेजुबान जानवरों और पक्षियों की रक्षा करें जो हमारा हमारा कर्तव्य व दायित्व है.!

S.P.RAWAT नई दिल्ली

Managing Director/Editor in Chief Cont.9810566149

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