आनलाइन सुविधा द्वारा शिक्षा प्रदान करने वाले स्कूल ही उचित फीस कि मांग करें–प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप पाण्डेय

‘■स्कूल नही तो फिस नही’ मुहिम मे भारतीय युवा जनकल्याण समिति के पदाधिकारियों ने सहमती जतायी■.
■आनलाइन सुविधा द्वारा शिक्षा प्रदान करने वाले स्कूल ही उचित फिस कि मांग करें–प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप पाण्डेय■

शिक्षा के क्षेत्र मे जनमानस को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है,कोरोना संकट काल मे एक तरफ जहां जनता महामारी से परेशान है तो दूसरी तरफ जनता वेरोजगार हो गयी है और इस वेरोजगारी मे व्यक्ति के खर्चे भी नियन्त्रण मे नही है स्कूल-कालेज मे अपने बच्चों को शिक्षा प्रदान करा रहे अभिभावक गण स्कूल फिस से परेशान है.
इस सम्बन्ध मे आज दिनांक 29 जुलाई दिन बुधवार को भारतीय युवा जनकल्याण समिति के संचालक व प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप पाण्डेय से संगठन के पदाधिकारियों ने अभिभावक व शिक्षक स्कूल फिस कि समस्या व आनलाइन पढ़ाई पर विडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यय से बात किये.
भारतीय युवा जनकल्याण समिति के पदाधिकारियों मे से बहुत से ऐसे लोग है जिनके बच्चे छोटे से बड़े स्कूल- कालेज मे पढ़ाई करते है और इस कोरोना संकट काल मे अन्य अभिभावकों कि तरह स्कूल द्वारा मांगे जा रहे फिस से परेशान है साथ ही संगठन मे विभिन्न जिलों से जुड़े पदाधिकारी व कार्यकर्ता भी है जो प्राईवेट स्कूल कालेज मे शिक्षक है. दोनों पक्षों कि समस्याओं को सुनते हुए प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप पाण्डेय जो स्वयं ही एक स्कूल मे उप प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं ने कहा कि कोरोना संकट सभी क्षेत्र मे एक समान अपना प्रभाव दिखाया है आर्थिक स्तर पर सभी लोग परेशान है, बहुत से लोगो का रोजगार व व्यापार बन्द हो गया है आय का कोई स्त्रोत नही दिखाई दे रहा है.
शिक्षा क्षेत्र मे बात करें तो स्कूली अभिभावक के साथ साथ स्कूल प्रबन्धन व अध्यापकगण भी परेशान है, कुलदीप पाण्डेय ने अभिभावको,स्कूल प्रबन्धन व शिक्षको कि समस्या को सुनते हुए सबके हितों मे बात करते हुए अपना विचार व्यक्त किये कि अभिभावक का कथन स्कूल नही तो फिस नही सही है परन्तु अभिभावक अपने बच्चों के ही बारे मे ना सोंचे,प्राईवेट स्कूल के शिक्षक गण और स्कूल प्रबन्धन पर भी विशेष ध्यान दें, वेरोजगारी के इस विकट परिस्थिति मे जैसे अभिभावक अपने बच्चों के स्कूल फिस देने मे स्मर्थथता दिखा रहे हैं सोचियें आप लोग एक या दो बच्चें के फिस जमा करने मे परेशानी महसूस कर रहे है तब आप थोड़ा ये भी सोचिये कि प्राईवेट स्कूल के शिक्षक जिसके महिने से उसके परिवार के सभी दर्जनों लोगो का भरण पोषण होता है.
अभिभावक देर सबेर फिस जमा कर सकता है या दूसरे से मांग कर काम चला सकता है लेकिन क्या एक परिवार चलाने वाला प्राईवेट स्कूल का शिक्षक बार बार दस पन्द्रह हजार रुपये अपने परिवार के लालन पालन के लिए मांग सकता है? पाच सौ हजार रुपये होते तब लोग एक दो देकर फिस जमा करा सकते है लेकिन महिने का किसी के घर का खर्चा नही चला सकते. संगठन के गोरखपुर जिला उपाध्यक्ष नितिन श्रीवास्तव ने बच्चे के अभिभावक के रुप मे अपनी समस्या साझा किये जिसमे महंगी किताब,कापी, ड्रेस एवं स्कूल फिस कि बात किये जो एक अभिभावक कि नाराजगी बिना स्कूल चले ही फिस लेगा सत प्रतिशत सही भी है वेरोजगारी का हवाला देते हुए सरकार के शिक्षा विभाग से नितिन श्रीवास्तव ने तीन से छ: माह कि फिस माफ करने कि मांग किये तथा स्कूल नही तो फिस नही कि मूहिम चलाने बात कर परेशान विभिन्न क्षेत्रों के अभिभावको को जोड़कर फिस के प्रति स्कूल प्रबन्धन से बात कर फिस माफी व समय बढ़ोत्तरी का विचार रखे.संगठन का युवा कार्यकर्ता आदित्य मिश्रा ने भी अपनी बहन के शहर मे स्थित एक स्कूल द्वारा नोटिस भेजकर कोरोना संकट काल के दौरान के माह कि भी फिस मांगने कि समस्या प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप पाण्डेय को सुनाये जिसके लिए सर्व प्रथम स्कूल प्रबन्धन से मिलने के लिए प्रदेश अध्यक्ष ने सुझाव दिये और कहा कि चाहे तो स्कूल प्रबन्धन अपने स्वेच्छा से फिस माफ कर सकता है या समय दे सकता है, क्योकि सरकार द्वारा फिस माफी के सम्बन्ध मे कोई दिशा निर्देश नही आया है.शिक्षा विभाग के मंत्री ने साफ कहा है कि फिस माफ नही होगा समया व सामर्थथुसार जमा करने का अभिभावक प्रयास करेंगे जोर जबरजस्ती से प्रबन्धन बच्चों को फिस के लिए दबाव नही डालेंगे.जो सक्षम स्कूल प्रबन्धन थे उन्होने स्वेच्छा से तीन माह का फिस माफ किया है जिसमे सरकार कि कोई आवश्यक गाइडलाईन नही थी.शक्ति नन्दन श्रीवास्तव,अजय सहानी निखिल गुप्ता आदि भिभावकों कि भी स्कूल फिस को लेकर समस्या रही जिनमे किसी के भाई किसी कि बहन किसी का बेटा आदि स्कूल मे शिक्षा ले रहें है जिसमे अनेक स्कूल प्रबन्धन ने बच्चों कि सुविधा हेतु आनलाइन पढ़ाई कि सुविधा प्रदान कर रहें है इसी क्रम मे संगठन के प्रदेश उपसचिव आदित्य पाण्डेय ने आनलाइन पढ़ाई बच्चों के लिए अनुउयोगी है बताते हुए कहा कि स्कूल से बेहतर आनलाइन सुविधा से पढ़ाई बच्चें नही कर पाते है सिर्फ महिने कि फिस मिलने के लिए स्कूलों ने इसका उपयोग कर रहे हैं.
शिक्षक होने कारण प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप पाण्डेय ने आनलाइन पढ़ाई पर अपने विचार रखते हुए कहा कि आनलाइन सुविधा द्वारा शिक्षा प्रदान करने वाले स्कूल ही उचित फिस कि मांग करें.
प्रयोगात्मक रुप से वर्तमान परिस्थियों को देखा जाये तो आनलाइन पढ़ाई कि व्यवस्था कुछ समय पहले ही होना चाहिए था परन्तु जून-जुलाई से प्रारम्भ क्लासेस से बच्चों के मानसिक तनाव को सहारा मिला है स्कूल से बेहतर तो नही कहेंगे लेकिन आनलाइन पढ़ाई को कम भी नही कह सकते. आनलाइन से तीन चार लाभ सामने आये हैं पहला कि डिजिटल इण्डिया कि मूहिम मे आनलाइन शिक्षा छोटे स्तर से ही अपना कदम रख दी है.दूसरा बच्चे घर मे है सुरक्षित है जान है तो जहान है तीसरा स्कूल के शिक्षक आपके बच्चे को क्या पढ़ा रहे है? भाषा शैली कैसी है? क्या सही है क्या गलत सब अभिभावको के सामने रहता है जिससे अभिभावको को डायरेक्ट कुछ पूछने या सुझाव याय समस्या अपनी बता सकते है .चौथा कि बच्चों को ट्रांसपोर्टेशन चार्ज नही देना पड़ रहा है और सबसे अहम बात कि रोजगार व व्यापार मे व्यस्त अभिभावक गण को स्कूल बच्चे को लेने लेजाने के जिम्मेदारी से समय बचा हुआ है सारे दिन घर पर महामारी मे बच्चों को परिवार वाले ध्यान दे रहे है.और रही बात स्कूल कि जब स्कूल मे बच्चे पढ़ने जाते थे उसके बावजूद भी स्कूल फिस से अधिक फिस देकर छोटे हो या बड़े कक्षा के छात्र कहीं न कहीं ट्यूशन या होम ट्यूशन करते ही है. जागरुकता के साथ अभिभावक,स्कूल प्रबन्धन व शिक्षक गण सोंच समझकर निर्णय ले कोरोना सभी को एक समान प्रभावित किया है.

S.P.RAWAT नई दिल्ली

Managing Director/Editor in Chief Cont.9810566149

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