अधिक मास (मलमास) 18 सितम्बर से 16 अक्टूबर तक.भगवान विष्णु ने मलमास को दिया पुरुषोत्तम मास का वरदान–पं.बृजेश पाण्डेय ज्योतिषाचार्य

अधिक मास (मलमास) 18 सितम्बर से 16 अक्टूबर तक.भगवान विष्णु ने मलमास को दिया पुरुषोत्तम मास का वरदान–पं.बृजेश पाण्डेय ज्योतिषाचार्य.

भारतीय विद्वत् महासंघ के महामंत्री व भारतीय युवा जनकल्याण समिति के संस्थापक संरक्षक पं. बृजेश पाण्डेय ज्योतिषाचार्य ने बताया कि संवत् 2077 के अश्विन मास मे मलमास लग रहा है जिसे अधिक मास एवं पुरुषोत्तम मास भी कहते है, अंग्रेजी तिथि के अनुसार मलमास 18 सितम्बर से 16 अक्टूबर तक रहेगा! भगवान पुरुषोत्तम ने स्वयं को मलमास का स्वामी बनाकर इसे सभी मासों का अाधिपति पूज्य एवं वंदनीय होने का वर दिया है! इसलिए इस मास मे अधिकाधिक धार्मिक कार्य,स्नान, दान अत्यन्त पुण्यदायी माना गया है!
ज्योतिषाचार्य पं. बृजेश पाण्डेय ने बताया कि अधिकमास मे व्रत,ध्यान, पूजा, दान व हवन करने से समस्त पाप धूल जाते है.भागवत महापुराण मे लिखा है कि मलमास के दौरान किये गये सभी कर्मों का कोटि गुणा फल मिलता है, इस मास मे भगवान विष्णु के समक्ष दीपक प्रज्जवलित करने से लक्ष्मी जी कि कृपा बनी रहती है! पवित्र नदियों मे स्नान व दीपदान करने से दरिद्रता व अशुभ स्वप्नों का नाश होता है.

पं. बृजेश पाण्डेय ने अधिकमास एवं मलमास कैसे हुआ पुरुषोत्तम मास इसके बिषय मे रोचक कथा का वर्णन किये, मलमास का कोई स्वामी नही था जिसके कारण लोग इसे अशुभ मानते थे,इस बात से नाराज मलमास ने देवलोक मे जाकर भगवान विष्णु से विनती करते हुए मलमास ने भगवान के श्रीचरणों मे दंडवत होकर कहा कि हे प्रभु मै मलमास हूँ,इस सृष्टि मे क्षणपल, मुहूर्त,नक्षत्र, मास व वर्ष सभी अपने-अपने स्वामियों के आधिपत्य मे है और उनसे प्राप्त अधिकारों से स्वछंद व अभय रहते है, किन्तु एक मै ही ऐसा दुर्भाग्यशाली हूँ जिसका कोई स्वामी नही है,जिसके कारण सदैव मेरा अनादर होता है मेरी अवधि मे कोई भी किसी भी प्रकार का शुभ कार्य नही करता है! प्रभु आप दयावान है कृप्या मुझे मुक्ति दीजिए!
भगवान विष्णु ने प्रार्थना सुनकर वर दिया कि मेरे अन्दर जितने सदगुण है, उन सभी को मै तुम्हे सौंप रहा हूँ अबसे तुम वेद शास्त्रों मे विख्यात मेरे नाम पुरुषोत्तम से जाने जाओगे! उसी समय से मलमास पुरुषोत्तम मास के नाम से विख्यात हो गया.
पं. बृजेश पाण्डेय ने यह भी बताया कि भारतीय पंचांग पद्धति मे अधिकमास कि अवधारणा वैसे ही है जैसे अंग्रेजी कलेण्डर के लीप वर्ष मे फरवरी माह के एक दिन बढ़ने कि व्यवस्था. भारतीय पद्धति के अनुसार जिस अमांत या पूर्णिमांत माह मे दो अमावस्या के मध्य सूर्य की संक्रान्ति न हो तो वह अधिक मास कहलाता है ,इसी प्रकार जिस अमावस्याओं के मध्य दो सूर्य संक्रान्ति हो तो वह क्षय मास होगा! तिथियों कि गणना चन्द्रमा और सूर्य की गति के आधार पर होती है. शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक 32 माह 16दिन व 4घटी पश्चात एक अधिकमास के बाद दूसरे अधिकमास की आवृति होती है, वही जिस वर्ष मे क्षय मास होता है उस वर्ष अधिकमास भी अवश्य होता है.जिस वर्ष मे अधिकमास होता है उस वर्ष मे 384 या 383 तथा महिनों कि संख्या 13 हो जाती है!
इस महिने मे उपवास भगवान सूर्य कि पूजा तथा कास्य पात्र मे भरे हुए अन्न, वस्त्र आदि का दान करना श्रेयस्कर होता है. व्रत का विधान यह है कि मलमास प्रारम्भ होने पर प्रात: नित्यकर्म और स्नान करके सूर्य भगवान का पूजन करें घी, गुड़ और अन्न का दान नित्य करें तथा देशी घी, गेहूँ और गुड़ के बनाये हुए 33 मालपुआ व स्वर्ण सहित कासें के वर्तन मे रखकर “विष्णु रुपी सहस्त्राशु सर्वपाप
प्रणाशन: अपूपान्न प्रदानेन मम पापव्यपोहतु”
का उच्चारण कर प्रतिदिन सामर्थनुसार दान करें!

पं.बृजेश पाण्डेय ज्योतिषाचार्य
9936256703

S.P.RAWAT नई दिल्ली

Managing Director/Editor in Chief Cont.9810566149

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